क्या आप किसी से कुछ काम करवाना चाहते हो तो ध्यान रखनी चाहिए ये बातें होगा आप का कम सफल जाने कैसे पूरा पढ़े …

क्या आप किसी से कुछ काम करवाना चाहते हो तो ध्यान रखनी चाहिए ये बातें जो ..

दूसरों से काम लेना हो तो तीन तरीके अपनाए जा सकते हैं। येे किष्किंधा कांड में सुग्रीव ने बड़े अच्छे ढंग से पूरे किए थे। सीताजी की खोज में वानरों को भेजने के उनके आदेश में तीन स्तर थे- सबसे पहले समझाया, फिर निवेदन किया और फिर डराया।
तुलसीदासजी ने लिखा है कि-
ठाढ़े जहं तहं आयसु पाई, कह सुग्रीव सबहि समुझाई।
राम काजु अरु मोर निहोरा, बानर जूथ जाहु चहुं ओरा।।
जनकसुता कहुं खोजहु जाई, मास दिवस महं आएहु भाई।
अवधि मेटि जो बिनु सुधि पाए, आवइ बनिहि सो मोहि मराएं।।
अर्थात यह श्रीरामजी का काम है और मेरा अनुरोध है, तुम चारों ओर जाकर जानकीजी की खोज करो। महीनेभर में वापस आ जाना। जो इस अवधि में बिना पता लगाए लौटेगा, उसे मैं मृत्युदंड दूंगा।
किसी से काम लेना हो तो हमें यह कला आनी चाहिए कि सामने वाले को उस काम के बारे में ठीक से समझा सकें। सुग्रीव ने वानरों से निवेदन किया। हमारे आदेश में भी निवेदन का भाव होना चाहिए। नई पीढ़ी के बच्चे खूब परिश्रम करते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा आदेश की भाषा सुनने को तैयार नहीं होते। वे पूरा आदर-भाव चाहते हैं। सुग्रीव ने यही किया था पहले समझाया, फिर निवेदन किया, लेकिन केवल समझाने या निवेदन करने से भी काम नहीं चलता। सख्ती और अनुशासन भी जरूरी है। अंत में सुग्रीव ने सबको धमकाया भी।

इस पूरे प्रसंग से हमें भी समझ जाना चाहिए कि किसी से काम लेना हो तो पहले उसे ठीक से समझाएं, आदेश में विनम्रता का भाव रखें, लेकिन इतनी संभावना जरूर छोड़ें कि यदि काम नहीं होता है तो अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किस सुंदर ढंग से इसे सुग्रीव ने पूरा किया, क्योंकि वहां श्रीराम मौजूद थे। श्रीराम की मौजूदगी मतलब शांति, अपनापन, प्रेम, अनुशासन। इन्हीं के साथ इस तरह के निर्णय लिए जाएं।

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