फैसन के जबाने में हम लोग पार्टी या होटल में प्लास्टिक के बर्तन का उपयोग कर रहे जो प्लास्टिक के बर्तन में 32 प्रकार के कैंसर होने की खतरा है जाने पूरा पढ़े सेहत बचाए …..

फैसन के जबाने में हम लोग भूल जा रहे है अपने सेहत के बारे में .प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है 

प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने से कैंसर का खतरा है या नहीं!

अक्सर इस बात पर बहस होती है कि प्लास्टिक के बर्तनों में खाना गर्म करना या खाना-पीना नुकसानदायक है. जानिए, प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाना कितना नुकसानदायक हो सकता है.
क्या प्लास्टिक के कप में चाय पीने से कैंसर हो सकता है? सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है. जिसके जरिए, खाने-पीने और खाने को प्लास्टिक के बर्तनों में इस्तेमाल करने से वालों को हिदायत दी जा रही है.
इस मैसेज में ये दावा किया जा रहा है कि प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल करने से कैंसर जैसी भयानक बीमारी हो सकती है. तो चलिए देखते हैं एम्स के हवाले इस मैसेज के वायरल होने का सच क्या है?
दिल्ली एनसीआर हो या फिर लखनऊ कानपुर, दफ्तर के बाहर नुक्कड़ पर प्लास्टिक के कप में चाय पीना बेहद आम है. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक मैसेज में इस आम सी बात को शरीर के लिए बेहद खतरनाक बताया जा रहा है.
देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स के हवाले से वायरल हो रहे इस मैसेज में कैंसर होने के तीन कारण बताएं जा रहे हैं.
पहला- चाय कभी भी प्लास्टिक के कप में ना पीएं.
दूसरा- कोई भी गर्म चीज प्लास्टिक में ना डालें, खासतौर पर भोजन.
तीसरा- खाने की चीजों को माइक्रोवेव में प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म ना करें.
मैसेज में आगे लिखा है कि याद रखें प्लास्टिक जब गर्मी के संपर्क में आता है तो ऐसा रसायन उत्पन्न होता है जिससे 32 प्रकार के कैंसर होने का खतरा रहता है.
जब इस मैसेज का सच जानने के लिए एबीपी ने पड़ताल की और दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. श्याम अग्रवाल से बात की. उन्होंने बताया कि प्लास्टिक के कप या प्लास्टिक के बर्तन में खाने की चीजें डालने से कैंसर होने के कोई वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आए हैं और ना ही इस पर अब तक कोई रिसर्च हुई है.
डॉ. अग्रवाल का ये भी कहना है कि इस मामले पर एक बड़ी रिसर्च होनी चाहिए जिसमें उन महिला और पुरूषों को शामिल किया जाना चाहिए जो प्लास्टिक के बर्तनों में खाते-पीते हैं और जो बिल्कु‍ल भी प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करते. वे आगे कहते हैं ऐसी रिसर्च होना बहुत मुश्किल भी है लेकिन प्लास्टिक में कुछ तो रसायन होते ही हैं. ऐसे में प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल ना करें तो ज्यादा बेहतर है.
डॉ. अग्रवाल ने ये भी कहा है कि प्लास्टिक इंडस्ट्री में काम करने वाली महिलाओं में कैंसर ज्यादा देखने को मिला है. ऐसी महिलाओं में ब्रेस्ट और यूट्रेस कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
डॉ. अग्रवाल ये भी कहते हैं कि चाय या अन्य खाने-पीने की चीजों का प्लास्टिक के बर्तनों से संपर्क बहुत कम समय के लिए होता है. ऐसे में ये कितना असर डाल पाता है ये कहना मुश्किल है. उन्होंने ये भी कहा है कि प्लास्टिक के बोतल या कंटेनर में पानी पीने और रखने से कितना कैंसर को खतरा है इसका कोई क्लीयर एविडेंस मौजूद नहीं है. लेकिन वे कहते हैं जितना प्लास्टिक के बर्तनों का खाने में कम इस्तेमाल करेंगे. उतना ही आप सुरक्षित रह पाएंगे

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